सोमवार, 18 जनवरी 2021

प्राणायाम योग(pranayama yoga)

प्राणायाम योग(pranayama yoga):


              

प्राणायाम योग (Pranayama yoga) जीवन का एक अभिन्न अंग है। प्राणायाम से ऊर्जा को नियंत्रित किया जा सकता है और स्वस्थ शरीर को प्राप्त किया जा सकता है। पतंजलि ने अपने योग सूत्र के पाठ में प्राणायाम को जागरूकता की उच्च अवस्था को प्राप्त करने के साधन के रूप में उल्लेख किया है। प्राणायाम को आम तौर पर सांस नियंत्रण की प्रक्रिया समझा जाता है। प्राणायाम दो शब्दों के मेल से बना है: प्राण और आयम। प्राण का मतलब महत्वपूर्ण ऊर्जा या जीवन शक्ति है। वह शक्ति जो सभी चीजों में मौजूद है, चाहे वो जीवित हो या निर्जीव। प्राणायाम श्वास के माध्यम से यह ऊर्जा शरीर की सभी नाड़ियों में पहुँचाती है। आयम शब्द का अर्थ है नियंत्रण और योग में इसे विभिन्न नियमों या आचार को निरूपित करने के लिए प्रयोग किया जाता है। मगर प्राणायाम शब्द में प्राण के साथ यम नहीं आयम की संधि की गयी है। आयम का मतलब है एक्सटेंशन या विस्तार करना। तो इसलिए प्राणायाम का सही मतलब है प्राण का विस्तार करना।


प्राणायाम की परिभाषा:

प्राणायाम एक संस्कृत शब्द है जिसे वैकल्पिक रूप से "प्राण के विस्तार" के रूप में अनुवादित किया जाता है। यह शब्द दो संस्कृत शब्दों से बना है: प्राण का अर्थ है साँस या जीवन शक्ति और याम का अर्थ है।

प्राणायाम करने का तरीका:

चुपचाप एक मिनट के लिए बैठें। सामान्य रूप से श्वास लें और छोड़ें। इस एक मिनट के दौरान, सोचें कि आप स्वस्थ होने और मजबूत बनने के लिए शरीर और मन में ऊर्जा प्राप्त करने जा रहे हैं। सोचें कि आप मन की सारी अशुद्धियों श्वास के माध्यम से बाहर निकालने वाले हैं और आप ऊर्जा और प्राण श्वास लेने के साथ प्राप्त करने वाले हैं। सोचें कि आप जो श्वास लेंगे, वह जीवन, ताकत, सकारात्मकवाद और ऊर्जा से बाहरी होगी।आखें बंद कर लें, दृष्टि को नाक पर केंद्रित करें, पीठ सीधी रखें, और दिमाग़ को शांत करें। एक गहरी साँस लें, बहुत धीरे-धीरे से, जल्दबाज़ी ना करें। सोचें कि आप मान और शरीर में ऊर्जा और प्राण भर रहे हैं। धीमी गति से साँस छोड़ें। साँस छोड़ने की अवधि साँस लेने की अवधि के जितनी ही होनी चाहिए। सांस छोड़ते समय, सोचें कि आपके शरीर और दिमाग के सभी दोष बाहर निकाल रहे हैं। (अपनी सुविधा के अनुसार 10-20 बार दोहराएं। )


प्राणायाम के भेद:

प्राणायाम के प्रकारों को लेकर योग के ग्रंथों में अलग-अलग विचार हैं। इस क्रिया के लगभग 50 प्रकारों का वर्णन ग्रंथों में मिलता है। लेकिन यहां पर अग्निसार, कपालभाति, भस्त्रिका, शीतली, शीतकारी, सूर्यभेदी, उज्जायी, भ्रामरी और नाड़ीशोधन इन 9 प्राणायामों का वर्णन किया जा रहा है। इनमें से भस्त्रिका और सूर्यभेदी प्राणायाम सर्दियों के लिए विशेष तौर पर लाभदायक हैं और शीतली व चंद्रभेदी ग्रीष्मऋतु में विशेष लाभ देते हैं, जबकि नाड़ीशोधन, उज्जायी, भ्रामरी और कपालभाति को सर्दी-गर्मी दोनों ऋतुओं में किया जा सकता है। वैसे तो, यदि प्रात:काल, खाली पेट प्राणायाम का अभ्यास किया जाए तो वह ज्यादा सही है, पर यदि ऐसा संभव न हो, तो भोजन के 3-4 घंटे बाद ही यह अभ्यास करना चाहिए। प्राणायाम शीत और ग्रीष्म ऋतुओं से भी संबंधित हैं, इसलिए इस बात का भी अभ्यास में ध्यान रखें अर्थात् सर्दियों में शीतली व शीतकारी प्राणायाम का अभ्यास न करें और गर्मियों में भस्त्रिका और सूर्यभेदी का। साथ ही, शीतली व शीतकारी प्राणायाम वातप्रकृति वाले साधक को भी नहीं करना चाहिए।


प्राणायाम के मुख्य प्रकार:

सूर्यभेदी प्राणायाम

भस्त्रिका प्राणायाम

भ्रामरी प्राणायाम

उद्गीथ प्राणायाम

उज्जायी प्राणायाम

शीतली प्राणायाम

शीतकारी प्राणायाम

बाह्य प्राणायाम

अनुलोम-विलोम प्राणायाम

कपालभाति प्राणायाम

नाड़ीशोधन प्राणायाम


प्राणायाम कैसे करें:

प्राणायाम योग आसन के अभ्यास के बाद किया जाना चाहिए। प्राणायाम में श्वास केवल नाक के माध्यम से ली जाना चाहिए सिवाय शीतलता और शीतकारी प्राणायाम में। प्राणायाम के दौरान, आँखें बंद करे, गहरी सांस अंदर ले इसे करते समय कुछ न सोचे । जितना सभव हो सके सांस को रोके और धीरे धीरे सांस बहार निकले ।


प्राणायाम के तीन चरण हैं, जिन्हें आप प्राणायाम क्रम भी कह सकते है:

1) धीमी गति से श्वास लें गहरी स्वास ले,  बहुत धीरे-धीरे और लगातार। यह सोचना चाहिए कि आप आप ऊर्जा को अपने शरीर में ले रहे हैं।

2) साँस को तब तक रोके रखें जब तक आरामदायक हो। इस समय के दौरान, सोचें कि प्राण मस्तिष्क से लेकर पैर तक पूरे शरीर को साफ कर रही है।

3) साँस छोड़ने की अवधि साँस लेने की अवधि से अधिक होनी चाहिए। साँस छोड़ते समय, सोचें कि आपके शरीर और दिमाग की सभी अशुद्धियाँ जो साफ़ हो गई थीं, अब शरीर से बाहर निकल गयी है।

अपनी सुविधा के आधार पर तीन से दस बार के लिए चरणों को दोहराएं। प्राणायाम के बाद, आपको कम से कम पांच मिनट के लिए एक ही जगह पर बैठने चाहिए।


प्राणायाम के नियम:

प्राणायाम शुरू करने से पहले सूर्य नमस्कार, कोई गतिशील व्यायाम या योग आसन करे इसे फेफड़ों फुलते और सिकोड़ते है । 

खाली पेट या चाय आदि के 15 मिनट बाद प्राणायाम करे। 

प्राणायाम का समय - सुबह सही समय है प्राणायाम करने का, इसे ताजी हवा और ऊर्जा दिमाग और शरीर मे भर जाती है।

प्राणायाम स्थान - पर्याप्त हवा, प्रकाश के साथ स्थान शोर मुक्त और विशाल होना चाहिए। यदि एक बंद कमरे में करे, तो खिड़कियों को खुला रखे ।

प्राणायाम आसन - फर्श पर एक चटाई पर बैठें, पीठ को सीधा रखे और सामने की तरफ देखे  । घुटने की समस्या वाले लोगों के लिए और जो फर्श पर नहीं बैठ सकते वहे एक कुर्सी का उपयोग करे ।


प्राणायाम के लाभ:

प्राणायाम का अभ्यास तनाव, अस्थमा और हकलाने से संबंधित विकारों से छुटकारा दिलाने में मदद करता है।

इसके अलावा नियमित रूप से प्राणायाम करने से लंबी आयु प्राप्त होती है।

प्राणायाम आपके शरीर में प्राण शक्ति बढ़ाता है।

अगर आपकी कोई नाड़ी रुकी हुई हो तो प्राणायाम उसको खोल देता है।

प्राणायाम मन को स्पष्टता और शरीर को सेहत प्रदान करता है।

शरीर, मन, और आत्मा में प्राणायाम करने से तालमेल बनता है।

प्राणायाम तनाव संबंधी विकार के इलाज में फायदेमंद है।

प्रतिदिन प्राणायाम का अभ्यास करने से स्थिर दिमाग और दृढ़ इच्छा शक्ति में सहायता करता है।

प्राणायाम वजन घटाने के लिए उत्कृष्ट है।


प्राणायाम की सावधानियां:

यह गर्भवती महिला या 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं है।

अस्थमा, पुरानी खांसी जैसी श्वसन समस्याओं वाले लोगों इसे न करे।

गंभीर बीमारियों वाले लोगों के लिए उपयुक्त नहीं है जैसे कि हृदय की स्थिति, कैंसर आदि।

यदि चक्कर आने लगे या साँस लेने में कठिनाई होने लगे, पसीना आशिक आने लगे, या अंशकार छाने की भावना महसूस होने लगे तो तुरंत प्राणायाम करना रोक दें। खुली हवादार जगह पर जा कर बैठ जायें, और सामान्य रूप से साँस लें। प्राणायाम फिर से करने की कोशिश ना करें।


धन्यवाद।।

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