शनिवार, 16 जनवरी 2021

अनुलोम-विलोम प्राणायाम के लाभ (Anulom-Vilom yoga)

अनुलोम-विलोम प्राणायाम(Anulom-Vilom yoga):

दोस्तों, अनुलोम-विलोम के लाभ जानने से पहले आपको अनुलोम-विलोम का अर्थ समझना होगा। अनुलोम का अर्थ सीधा और विलोम का अर्थ उल्टा। अनुलोम-विलोम नाड़ी शोधन प्राणायाम है। नाड़ी जिसे अंग्रेजी में पल्स कहा जाता है और शोधन यानी सफाई। नाड़ियों को साफ करने के लिए इस प्राणायाम को प्राचीन समय से किया जा रहा है।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम करने का तरीका:

1) किसी साफ जगह का चुनाव करें और वहां योगा मैट या कोई साफ चादर बिछाएं। ध्यान रहे कि अनुलोम-विलोम के लिए दाएं हाथ के अंगूठे और दाएं हाथ की मध्य उंगली को ही काम में लाया जाएगा।

2)अनुलोम-विलोम प्राणायाम करना बहुत आसान है, सबसे पहले अपनी आँखें बंद करें फिर पद्मासन या सुखासन में बैठें और अपने दोनो हाथों को अपने घुटनों पर रखें। कमर सीधी रखे और अपनी दोनों आंखे बंद कर दे।

3) बायीं नाक के छेद को हाथ के अंगूठे से दबाकर रखते है फिर नाक के दाएं छेद से गहरी श्वास अंदर भरते हैं और श्वास कुछ सेकंड जितना आप रोक सकते हो उतनी देर तक अंदर रोक के रखे फिर मध्यमा अँगुली से दाएं नाक के छेद को दबाकर बायीं नाक से श्वास बाहर निकालते है। 

4) इसी तरह दाएं नाक के छेद को अँगूठे से दबाकर रखते है फिर नाक के बाएं छेद से गहरी श्वास अंदर भरते हैं ओर  श्वास कुछ सेकंड जितना आप रोक सकते हो उतनी अंदर रोक के रखे फिर मध्यमा अँगुली से बायीं नाक के छेद को दबाकर दाएं नाक से श्वास बाहर निकालते है। 

5) इस प्रकार अनुलोम-विलोम प्राणायाम का एक चक्र पूरा हो जाएगा। आप एक बार में ऐसे पांच से आठ चक्र कर सकते हैं। इस प्रक्रिया को आप रोज करीब 10-15 मिनट तक कर सकते हैं।

यह क्रम लगातार कुछ देर तक दोहराते रहे। आपके अभ्यास हो जाये उसके बाद अनुलोम-विलोम प्राणायाम 10-15 मिनट तक कर सकते है। यह योग आप दिन में किसी भी समय कर सकते है परंतु अनुलोम-विलोम प्राणायाम करने का सुबह का समय अतिउत्तम होता है।

*शाम की तुलना में सुबह आठ बजे से पहले अनुलोम विलोम के फायदे ज्यादा हैं। 

*अनुलोम-विलोम का अधिक लाभ पाने के लिए खान-पान पर ध्यान रखें।

*गंभीर ह्रदय रोगी, रक्तचाप के रोगी और प्रेग्नेंट महिलाएं डॉक्टरी परामर्श लेने के बाद ही इस अभ्यास के लिए आगे बढ़ें।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम के लाभ:

1) अनुलोम-विलोम प्राणायाम को नियमित रूप से करने से वात, कफ और पित्त तीनों दोषों को ठीक किया जा सकता है।

2) अनुलोम-विलोम प्राणायाम हृदय रोगों से बचने के लिए भी फयदेमंद हैं। प्राणायाम या ब्रीथिंग एक्सरसाइज सांस को नियंत्रित करने के साथ-साथ ह्रदय की गति और उसमें आए परिवर्तन को नियंत्रित करने का काम करता है। ह्रदय के मरीजों के लिए अनुलोम विलोम प्राणायाम इसलिए भी फायदेमंद है, क्योंकि यह ह्रदय की क्षमता को बढ़ाने का काम करता है

3) अनुलोम-विलोम प्राणायाम हड्डी से जुड़े गठिया जैसे रोग में भी कारगर है। गठिया होने पर जोड़ों में असहनीय दर्द होता है। यहां अनुलोम-विलोम आपकी मदद कर सकता है। यह एक कारगर प्राणायाम है, जो हृदय की गति को नियंत्रित करने के साथ-साथ हृदय की क्षमता को भी बढ़ाने का काम करता है। ध्यान रहे कि हृदय रोग के अलावा मधुमेह और मोटापे के कारण भी अर्थराइटिस हो सकता है। इस लिहाज से भी अनुलोम-विलोम योगा आपकी मदद कर सकता है। अनुलोम-विलोम प्राणायाम मधुमेह से राहत दे सकता है और शरीर में चर्बी की मात्रा को नियंत्रित कर सकता है।यह 'वात दोष' की गड़बड़ी के कारण होने वाली सभी बीमारियों को ठीक करता है। इनमें गठिया रोग और  प्रजनन अंगों से संबंधित रोग है ।

4) अनुलोम-विलोम प्राणायाम प्राणायाम के नियमित अभ्यास से रक्तचाप और मधुमेह (Blood pressure and diabetes) को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है।

5) अनुलोम-विलोम प्राणायाम मांसपेशियों के रोग, पेट फूलना और अम्लता में भी फायदेमंद हैं।                                                                                                6) अनुलोम-विलोम प्राणायाम करने से सोच सकारात्मक होती है और आप तनाव, क्रोध, चिंता, विस्मृति, बेचैनी, उच्च रक्तचाप, माइग्रेन और नींद की कमी को दूर कर सकते है ।

7) अनुलोम-विलोम प्राणायाम तनाव और चिंताओं से छुटकारा दिलाने मे लाभकारी है।

8) अनुलोम-विलोम प्राणायाम रक्त परिसंचरण में सुधार करता है।

9) अनुलोम-विलोम प्राणायाम नकारात्मक विचारों को सकारात्मक में बदलने में मदद करते है।

10) अनुलोम-विलोम प्राणायाम कब्ज, गैस्ट्रिक जैसी पेट संबंधी समस्याओं के लिए भी फायदेमंद हैं। जैसा कि आप जानते हैं अनुलोम-विलोम प्राणायाम नाड़ी शोधन प्रक्रिया है। नाड़ी शोधन कब्ज से निजात देने का काम कर सकता है।

11) अनुलोम-विलोम प्राणायाम वजन को नियंत्रित करने के लिए भी किया जा सकता है। यह ब्रीथिंग एक्सरसाइज शरीर में चर्बी या फैट की मात्रा को नियंत्रित करने का काम करती है, जिससे आसानी से बढ़ते वजन पर काबू पाया जा सकता है।इसको नियमित करने से मोटापे को नियंत्रित किया जा सकता है।

12) अनुलोम-विलोम प्राणायाम त्वचा के लिए भी बहुत फायदेमंद हैं। जैसा कि ऊपर बताया गया है की अनुलोम विलोम प्राणायाम एक नाड़ी शोधन क्रिया है, जो शरीर को पूरी तरह से डिटॉक्स करने का काम करती है, जिससे त्वचा को भी लाभ मिलता है एवं त्वचा ओर अपने चेहरे की चमक(glow) को बढ़ाता है।

               

धन्यवाद।।


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